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रासायनिक एस्बेस्टस के संपर्क में आने से मेसोथेलियोमा विकसित होने का खतरा काफी बढ़ जाता है, और यही कारण है कि मेसोथेलियोमा को 'एस्बेस्टस कैंसर' भी कहा जाता है।
मेसोथेलियोमा एक ऐसी स्थिति है जिसमें अधिकांश आंतरिक अंगों पर मौजूद ऊतकों (मेसोथेलियम) की पतली सुरक्षात्मक परत में कैंसर बनता है। मेसोथेलियोमा आक्रामक प्रकार का कैंसर है, जिसका इलाज करना भी बहुत चुनौतीपूर्ण होता है। ज्यादातर मामलों में, मेसोथेलियोमा का पता उसके उन्नत चरणों में लगाया जाता है। रासायनिक एस्बेस्टस के संपर्क में आने से मेसोथेलियोमा विकसित होने का खतरा काफी बढ़ जाता है, और यही कारण है कि मेसोथेलियोमा को 'एस्बेस्टस कैंसर' भी कहा जाता है।
मेसोथेलियोमा की निर्मिति के क्षेत्र के आधार पर, मेसोथेलियोमा को वर्गीकृत किया गया है :
मेसोथेलियोमा जो लंग्ज (फेफड़ों) की परतों वाले ऊतकों में होता है, उसे प्ल्युरल मेसोथेलियोमा कहा जाता है। प्ल्युरल मेसोथेलियोमा यह मेसोथेलियोमा का सबसे आम प्रकार है।
इस प्रकार का मेसोथेलियोमा पेट की परत बनाने वाले ऊतकों को प्रभावित करता हैं।
पेरिकार्डियल मेसोथेलियोमा हृदय के मेसोथेलियम को प्रभावित करता है। यह अत्यंत दुर्लभ स्थिति है।
इस प्रकार का कैंसर वृषण (टेस्टिकल्स) की बाहरी परत (ट्यूनिका वेजिनालिस) में मौजूद सेल्स (कोशिकाओं) को प्रभावित करता है। वृषण (टेस्टिकुलर) मेसोथेलियोमा यह मेसोथेलियोमा का सबसे दुर्लभ प्रकार है। इसकी उत्पत्ति कहीं भी हुई हो, मेसोथेलियोमा बेहद आक्रामक होते हैं और आसपास के ऊतकों और अंगों को आसानी से नुकसान पहुंचा सकते हैं।
इस स्थिति के लक्षण इसकी उत्पत्ति के स्थान के आधार पर अलग अलग होते हैं। प्ल्युरल मेसोथेलियोमा, जो मेसोथेलियोमा का सबसे आम प्रकार है, उसमें निम्नलिखित लक्षण हो सकते हैं :
पेरिटोनियल मेसोथेलियोमा निम्नलिखित लक्षण पैदा कर सकता है :
पेरिकार्डियल मेसोथेलियोमा के कारण सीने में दर्द और सांस लेने में कठिनाई हो सकती है, और दूसरी ओर वृषण (टेस्टिकुलर) मेसोथेलियोमा के कारण वृषण (टेस्टिकल्स) में सूजन हो सकती है।
मेसोथेलियोमा होने का सटीक कारण अज्ञात है। हालांकि, कुछ प्रमुख जोखिम कारकों की पहचान की गई है :
एस्बेस्टस का संपर्क मेसोथेलियोमा के लिए प्राथमिक जोखिम कारक है। लंबे समय तक एस्बेस्टस के संपर्क में रहने वालों को मेसोथेलियोमा होने का खतरा अधिक होता है। एस्बेस्टस के साथ काम करने वाले किसी व्यक्ति के साथ रहने से भी इस बीमारी का खतरा बढ़ सकता है।
जिओलाइट्स खनिजों का एक वर्ग है जो रासायनिक रूप से एस्बेस्टस से संबंधित हैं, और लंबे समय तक इस खनिज के संपर्क में आने से मेसोथेलियोमा के विकास का जोखिम बढ़ सकता है।
किसी करीबी रिश्तेदार को मेसोथेलियोमा का निदान होना भी इस बीमारी के लिए एक जोखिम कारक है।
जिन लोगों ने कैंसर के इलाज के लिए छाती के क्षेत्र में रेडिएशन थेरेपी (विकिरण चिकित्सा) प्राप्त की है, उनमें भी इस रोग के विकसित होने का जोखिम अधिक हो सकता है।
अगर किसी व्यक्ति को मेसोथेलियोमा होने का संदेह होता है तो डॉक्टर विभिन्न परीक्षणों की सलाह देते हैं। निम्नलिखित कुछ विधियाँ हैं जिनका उपयोग मेसोथेलियोमा का पता लगाने और निदान करने के लिए किया जाता है :
जब किसी मरीज़ में पहली बार मेसोथेलियोमा के लक्षण दिखाई देते है, तब डॉक्टर लक्षणों के पीछे के कारण को समझने के लिए उसके चिकित्सा इतिहास का आकलन करते है। बाद में, वह मेसोथेलियोमा से जुड़े सूजन, गांठ और अन्य लक्षणों का पता लगाने के लिए शारीरिक परीक्षण भी कर सकता / सकती है।
यदि मेसोथेलियोमा का संदेह होता है, तो डॉक्टर मेसोथेलियोमा मार्करों, अर्थात् फाइबुलिन 3, ऑस्टियोपॉन्टिन और सोल्यूबल मेसोथेलिन - संबंधित पेप्टाइड्स (एसएमआरपी) की उपस्थिती की जांच करने के लिए रक्त परीक्षण की सिफारिश कर सकते हैं। हालांकि, निर्णायक निदान के लिए अतिरिक्त परीक्षणों की आवश्यकता होती हैं।
फ्लूइड (तरल) का निर्माण मेसोथेलियोमा के सामान्य लक्षणों में से एक है। इसलिए, डॉक्टर मेसोथेलियोमा सेल्स (कोशिकाओं) की उपस्थिति के बारें में पता लगाने के लिए फ्लूइड (तरल पदार्थ) का नमूना इकठ्ठा करने और इसकी जांच करने की सिफारिश कर सकते हैं। जिस क्षेत्र में फ्लूइड (तरल) की निर्मिति देखी गई हो, वहां से नमूना इकठ्ठा करने के लिए त्वचा के माध्यम से एक पतली सुई डाली जाती है।
असामान्य गांठ के बारें में अधिक जानकारी प्राप्त करने के लिए डॉक्टर द्वारा इमेजिंग टेस्ट, जैसे कि पेट सीटी स्कैन, एमआरआई स्कैन या सीटी स्कैन की सिफारिश की जा सकती है। मेसोथेलियोमा आस-पास के अंगों में फैल गया है या नहीं यह पता लगाने में भी ये स्कैन मदद करते हैं। ये परीक्षण रोग के स्टेजिंग, उपचार योजना और उपचार के प्रति मरीज़ की प्रतिक्रिया का मूल्यांकन करने के लिए आवश्यक हैं।
मेसोथेलियोमा का निश्चित निदान प्राप्त करने का एकमात्र तरीका बायोप्सी है। इस प्रक्रिया के दौरान, कैंसर होने की आशंका वाले क्षेत्र से सेल्स (कोशिका) का नमूना इकठ्ठा किया जाता हैं और माईक्रोस्कोपिक (सूक्ष्म) परीक्षण के लिए प्रयोगशाला में भेजा जाता हैं। एक महीन सुई डालकर या सर्जरी के दौरान सेल्स (कोशिका) का नमूना इकठ्ठा किया जा सकता हैं। एक बार निदान की पुष्टि प्राप्त हो जाने के बाद, उन्नत इमेजिंग की मदद से रोग का स्टेजिंग किया जाता है, और उसी के अनुसार उपचार की योजना बनाई जाती है।
मेसोथेलियोमा के लिए उपचार योजना विभिन्न कारकों के आधार पर बनाई जाती है, जैसे कि रोग का प्रकार, चरण, श्रेणी, मरीज़ की उम्र और उसकी कुल स्वास्थ्य स्थिति। मेसोथेलियोमा के लिए उपलब्ध तीन मुख्य उपचार विकल्पों में सर्जरी, रेडिएशन थेरेपी (विकिरण चिकित्सा) और कीमोथेरेपी शामिल हैं।
सर्जरी मेसोथेलियोमा के उपचार की मुख्य पंक्तियों में से एक है। सर्जरी या तो एक उपचारात्मक इरादे से की जा सकती है या उन्नत चरणों में रोग के कारण होने वाले लक्षणों का प्रबंधन करने के लिए की जा सकती है। रोग के चरण के आधार पर डॉक्टर द्वारा निम्नलिखित सर्जिकल प्रक्रियाओं में से एक की सिफारिश की जा सकती है।
यह सर्जरी ट्यूमर को उसके आसपास के स्वस्थ ऊतकों के एक छोटे हिस्से जिसे मार्जिन कहा जाता है उसके साथ निकाल देती है।
इस प्रक्रिया के दौरान, प्ल्यूरा या लंग्ज (फेफड़ों) के आस-पास के ऊतक की पतली परत को छाती की दीवार (जिस तरफ कैंसर मौजूद है उस तरफ) की परत के साथ निकाल दिया जाता है। इसके अतिरिक्त, मीडियास्टिनम और डायाफ्राम को कवर करने वाले प्ल्यूरा को निकाल दिया जाता है।
इस प्रक्रिया में लंग्ज (फेफड़े) (प्ल्यूरा) और हृदय (पेरीकार्डियम) की परत के साथ-साथ पूरे लंग्ज (फेफड़े) और डायाफ्राम के एक हिस्से को निकालना शामिल है। इस सर्जरी को अक्सर अन्य उपचार विधियों, जैसे की रेडिएशन थेरेपी (विकिरण चिकित्सा) और कीमोथेरेपी के साथ संयोजित किया जाता है।
प्लुरोडेसिस एक उपचार दृष्टिकोण है, जिसमें लंग्ज (फेफड़े) को स्थायी रूप से छाती की दीवार से जोड दिया जाता हैं। इस सर्जरी के दौरान परतों के बीच तरल पदार्थ या हवा का निर्माण नहीं होता है यह सुनिश्चित करते हुए लंग्ज (फेफड़ों) और छाती की दीवार के बीच के प्लुरल गैप (फुफ्फुस अंतर) को हटा दिया जाता है।
पेरिटोनेक्टोमी एक सर्जिकल प्रक्रिया है जहां सर्जन जितना संभव हो उतना रोग को हटाने की कोशिश करता है। कभी-कभी, प्रक्रिया में आंत के एक छोटे हिस्से को भी निकालना शामिल हो सकता है।
इस प्रक्रिया के दौरान, शक्तिशाली एंटीकैंसर या कीमो दवाओं के गर्म मिश्रण को सीधे उदर गुहा में पंप किया जाता है और कुछ समय के लिए वहां रखा जाता है। यह उदर गुहा में मौजूद मेसोथेलियोमा सेल्स (कोशिकाओं) को नष्ट करने में मदद करता है। ज्यादातर मामलों में, डीबल्किंग प्रक्रिया के बाद एचआईपीईसी (हिपेक) उपचार दिया जाता है।
ओमेंटम एक वसायुक्त ऊतक की परत होती है जो उदर क्षेत्र में मौजूद विभिन्न अंगों के लिए अस्तर बनाती है। क्योंकि पेरिटोनियल कैंसर अक्सर इस ऊतक तक फैलता है, इसलिए इसे पेरिटोनियल मेसोथेलियोमा सर्जरी के हिस्से के रूप में निकाल दिया जाता है।
मेसोथेलियोमा को फैलने से रोकने के लिए इस सर्जरी द्वारा पेरिकार्डियम के एक हिस्से या पूरे पेरिकार्डियम को निकाल दिया जाता है। यह सर्जरी मेसोथेलियोमा मरीज़ों के जीवन काल को बढ़ाने और लक्षणों को कम करने में मदद करती है।
यह प्रक्रिया हृदय के आस-पास की थैली में बने अतिरिक्त फ्लूइड (तरल पदार्थ) को निकाल देती है। यह प्रक्रिया उन्नत चरण के मेसोथेलियोमा मरीज़ों में लक्षणों से राहत दिलाने में मदद करती है।
जिन मरीजों को वृषण (टेस्टिकुलर) मेसोथेलियोमा का निदान हुआ है उनका इलाज ऑर्कियोक्टोमी से किया जा सकता है, जिसमें स्पर्मेटिक कॉर्ड के साथ एक या दोनों वृषण (टेस्टिकल्स) को निकाल दिया जाता है। इस प्रक्रिया को लिम्फैडेनेक्टॉमी के बाद भी किया जा सकता है, जो ट्यूमर के आस पास के प्रभावित लिम्फ नोड्स को निकाल देता है।वृषण (टेस्टिकुलर) मेसोथेलियोमा दुर्लभ होने के कारण, अक्सर इसका निदान उन्नत चरणों में किया जाता है और निदान गलत होने की भी संभावना हो सकती है।
कुछ प्रकार के मेसोथेलियोमा के इलाज के लिए रेडिएशन थेरेपी (विकिरण चिकित्सा) का भी उपयोग किया जाता है। इस उपचार दृष्टिकोण में कैंसर सेल्स (कोशिकाओं) को नष्ट करने या उन्हें बढने से रोकने के लिए ट्यूमर को हाई एनर्जी रेडिएशन बीम (उच्च-ऊर्जा विकिरण बीम) पहुंचाना शामिल है। मेसोथेलियोमा के लिए रेडिएशन (विकिरण) देने के दो तरीके हैं - आंतरिक और बाहरी। बाहरी बीम रेडिएशन थेरेपी (विकिरण चिकित्सा) के दौरान, रेडिएशन (विकिरण) बाहरी स्रोत से दिया जाता है; जबकि, आंतरिक रेडिएशन थेरेपी (विकिरण चिकित्सा) या ब्रेकीथेरेपी के दौरान, रेडिएशन (विकिरण) स्रोत ( रेडीओऐक्टिव पदार्थ) को ट्यूमर के अंदर या उसके बहुत करीब रखा जाता है; इस स्रोत द्वारा उत्सर्जित होने वाले रेडिएशन (विकिरण) मेसोथेलियोमा सेल्स (कोशिकाओं) को नष्ट कर देते है। ट्यूमर के स्थान पर रेडिएशन (विकिरण) स्रोत को पहुंचाने के लिए नीडल, सीड, कैथेटर या वायर का उपयोग किया जा सकता है।
ज्यादातर मामलों में, मेसोथेलियोमा का निदान उन्नत चरणों में किया जाता है, और यह अक्सर एक खराब प्रोग्नोसिस (पूर्वानुमान) का कारण बनता है। हालांकि, अगर प्रारंभिक चरणों में इसका निदान किया जाता है, तो इसका अच्छे नैदानिक परिणामों के साथ इलाज किया जा सकता है।
चूंकि मेसोथेलियोमा के कुछ विशिष्ट लक्षण नहीं होते है, इसलिए अक्सर इसका गलत निदान किया जाता है। इसलिए जिन लोगों को इस बीमारी का जोखिम अधिक हैं, उन लोगों को कैंसर का पता चलने पर दूसरी राय लेने पर विचार करना चाहिए। सही निदान प्राप्त करने के लिए यह महत्वपूर्ण है।
यह अत्यंत दुर्लभ होने के कारण और इसके विशिष्ट लक्षण ना होने के कारण, मेसोथेलियोमा का निदान करना तुलनात्मक रुप से चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
हालाँकि, आज हमारे पास कई परीक्षण उपलब्ध हैं जो इस स्थिति का सही-सही पता लगाने में हमारी मदद कर सकते हैं। मेसोथेलियोमा के लिए डॉक्टरों द्वारा अनुशंसित विभिन्न नैदानिक विधियों में रक्त परीक्षण, फ्लूइड (तरल) नमूना परीक्षण, इमेजिंग परीक्षण और बायोप्सी शामिल हैं।
मेसोथेलियोमा का सबसे आम और शुरुआती लक्षण दर्द है। जैसे-जैसे फ्लूइड (तरल पदार्थ) बनता है और ट्यूमर बढ़ता है और प्रमुख अंगों पर दबाव पड़ता है, तो सांस लेना, खांसना और पाचन भी पीड़ादायक हो सकता है। फ्लूइड (तरल पदार्थ) के जमाव के कारण छाती और पेट में दबाव बढ़ सकता है और दर्द भी हो सकता है। इन मामलों में, मरीज़ों को अपने इलाज करने वाले डॉक्टर से बात करनी चाहिए जो उन्हें दर्द प्रबंधन विशेषज्ञों के संपर्क में रख सकते हैं, जो दर्द के प्रबंधन और बीमारी के कारण होने वाली अन्य असुविधाओं के प्रबंधन में मदद कर सकते हैं।
यदि किसी मरीज में उन्नत चरण का मेसोथेलियोमा है, तो इस स्थिति का सफलतापूर्वक इलाज करना मुश्किल हो सकता है, और इसलिए, डॉक्टर उपशामक चिकित्सा की सिफारिश कर सकते हैं। उपशामक चिकित्सा मेसोथेलियोमा का इलाज नहीं करती है; इसके बजाय, इस चिकित्सा का उद्देश्य मरीज़ के जीवन काल को बढ़ाना, दर्द को कम करना और बीमारी के कारण होने वाली अन्य परेशानीयों को कम करना और मरीज़ के जीवन की गुणवत्ता में सुधार करना है।
लंबे समय तक एस्बेस्टस के संपर्क से बचना : एस्बेस्टस के संपर्क में आना मेसोथेलियोमा के लिए सबसे बड़ा जोखिम कारक है, और इस हानिकारक रसायन के संपर्क में आने को कम करने से आपके मेसोथेलियोमा के जोखिम को काफी कम किया जा सकता है। निम्नलिखित श्रेणियों के लोगों को मेसोथेलियोमा होने का जोखिम अधिक होता है :
इन व्यक्तियों को उपयुक्त सुरक्षा सामग्री पहनना आवश्यक है और एस्बेस्टस के साथ काम करने वाले लोगो ने अनुशंसित सभी सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन करना चाहिए।
जिओलाइट के संपर्क में आने से बचें : नियमित रुप से जिओलाइट्स के संपर्क में आने से भी आपके मेसोथेलियोमा का खतरा बढ़ सकता है। इसलिए, अपने आपको इस खनिज के संपर्क से बचाएं रखें ।
यदि आप मानते हैं की आपको मेसोथेलियोमा का जोखिम अधिक है, तो आपको अपने डॉक्टर से बात करनी चाहिए जो इस स्थिति के विकसित होने के जोखिम को कम करने के सर्वोत्तम तरीकों को जानने में आपकी मदद कर सकते हैं।